कोरोना को जब संक्रमण होता है तो उससे सबसे पहले और ज़्यादा प्रभावित फेफड़ा होता है, लेकिन किसी भी कोविड सेंटर में फेपड़ों की जाँच के लिए एक्स-रे मशीन की व्यवस्था नहीं की गई है. इसी तरह कोरोना से सर्वाधिक मौतें ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण हो रही हैं. प्रदेश के सभी कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन नहीं होने के कारण मरीज तड़प-तड़पकर मोत के मुँह में जा रहे हैं लेकिन प्रदेश सरकार की संवेदनाएँ तब भी मृतप्राय ही है. कोविड-19 से मुक़ाबले के लिए इम्युनिटी बढ़ाने पर ज़ोर तो दिया जा रहा है लेकिन कोविड अस्पतालों में बदइंतज़ामी का आलम यह है कि मरीजों को न समय पर चाय-नाश्ता मिल रहा है, न समय पर भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और न ही समय-समय पर काढ़ा दिया जा रहा है। साफ-सफाई की व्यवस्था भी इन अस्पतालों में पूरी तरह चरमराई हुई है और कोई भी इन तमाम अव्यवस्थाओं को दूर करने की ज़िम्मेदारी लेता नहीं दिख रहा है. शर्मा ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने अपने कोविड सेंटर्स के लिए उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों से संपर्क कर सुविधाएँ जुटाने के प्रयास किया है, तो प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी सत्तावादी अहंकार से उबरकर केंद्र सरकार से बेहतर समन्वय बनाकर और राज्य सरकारों से सहयोग जुटाने का प्रयास करना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं-प्रवक्ताओं को भी भाजपा नेता शर्मा की चुनौती, शर्मा ने कहा- अपना फोन नंबर सार्वजनिक करें
