नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी सिर्फ एक नारा नहीं था, छत्तीसगढ़ के विकास का संपूर्ण दर्शन है:मोहन मरकाम
ऽ सबके साथ न्याय कांग्रेस के लिये मूलभूत सिद्धांत है।
ऽ न्याय सिर्फ राजनैतिक पदयात्रा नहीं या सिर्फ योजना का नाम नहीं।
ऽ न्याय के लिये हम सिर्फ यात्रायें नहीं करते न्याय का अर्थ सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं थ। न्याय का अर्थ मजदूर गरीब महिलाओं सबको लाभ पहुंचाना है जो आज छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार कर रही है।
ऽ प्रदेश की राजीव गांधी किसान न्याय योजना ने यहां के किसानों को मजबूती देने के साथ पूरे देश को बता दिया कि परिस्तिथियां कितनी भी गम्भीर क्यो न हो ग्राम सुराज के माध्यम, गांव के माध्यम से, किसानों के माध्यम से गरीब महिलाओं सबको लाभ मिलता है।
ऽ हम सबके साथ न्याय करके ही देश को सशक्त कर सकते है।
ऽ नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी सिर्फ एक नारा नहीं था, छत्तीसगढ़ के विकास का संपूर्ण दर्शन है।
राजीव जी का नाम प्रतीक बन गया है, बड़े बदलाव का
राजीव जी के नाम की योजना में ला रही प्रदेश में क्रांति
ऽ राजीव गांधी किसान न्याय योजना से खेती किसानी को मजबूती तो मिली ही, पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मंडी के दौर में सहारा मिला। 9000 रू. प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि।
ऽ जब पूरे देश में कोविड संक्रमण के हालत गंभीर थी।
ऽ मंडी की विकट समस्या का सामना देश की अर्थव्यवस्था कर रही थी।
ऽ बेरोजगारी के कारण नौजवान दुखी एवं निराशा था।
ऽ ऐसे समय में राजीव गांधी किसान न्याय योजना, के माध्यम से खेती करने वाले किसानों को।
ऽ गोधन न्याय योजना के माध्यम से पशुपालकों को।
ऽ मछली पालन को खेती का दर्जा दिये जाने से मत्स्य कृषकों को लाभ मिला।
ऽ मनरेगा – महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना में छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य बना है।
ऽ तेलघानी विकास बोर्ड का गठन हुआ है। चर्म शिल्पकार बोर्ड, लौह शिल्पकार बोर्ड, रजककार विकास बोर्ड के गठन की प्रक्रिया जारी है।
पूरे देश में जब मंदी थी, छत्तीसगढ़ ने प्रगति की राह दिखाई।
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था न्याय योजनओं के द्वारा ही प्रगति की राह में गतिशील रही।
CMIE की रिपोर्ट ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ में 2018 में जो बेरोजगारी 22.2 प्रतिशत थी अब वो 3.4 प्रतिशत हो गई है।
राष्ट्रीय व राज्य स्तर पर रोजगार को लेकर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने जुलाई 2019 और जून 2020 तक श्रम बल सर्वेक्षण पर तीसरी वार्षिक रिपोर्ट जारी की। इसमें कोरोनाकाल और लाकडाउन के असर का भी जिक्र है।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में लोगो की नौकरियां तथा रोजगार प्रभावित हुआ। खनन उत्खनन, निर्माण, वित्तीय सेवा, रियल एस्टेट, उत्पादन, होटल, परिवहन, संचार और लोक प्रशासन जैसी सेवाएं प्रभावित रही। कोरोना काल में आर्थिक गतिविधियो के ठप हो जाने से नौकरियों में छत्तीसगढ़ में जो बेरोजगारी आई थी, उसकी भरपाई कृषि वानिकी व मछली से जुड़ी सेवाओं ने काफी हद तक की। इसके बावजूद खेती, वानिकी और मछलीपालन तथा इनसे जुड़े कारोबारों से प्रदेश के लोगो को रोजी-रोटी मिलती रही। इनसे लोगो के आर्थिक हालात ठीक रहे और छत्तीसगढ़ मंदी की गिरफ्त में भी नहीं रहा।
प्रदेश में बेरोजगारी दर कई राज्यों से कम
ऽ बेरोजगारी दर छत्तीसगढ़ में औसतन 10.1 फीसदी थी। जबकि आंधप्रदेश की 17.1, अरूणाचल प्रदेश की 23.8, असम की 27.5 और बिहार में 17.6 फीसदी थी।
ऽ सात साल से ऊपर साक्षरता की दर प्रदेश में 76.1 फीसदी थी। जबकि इसी अवधि में सर्वे में आंध्र प्रदेश की 63.2, अरुणाचल प्रदेश की 81.9 व असम की 87.9 व बिहार की 62.4 फीसदी थी।
ऽ 15 से 29 साल के लेबर फोर्स की दर सीजी में ग्रामीण व शहरी इलाकों में 51.9 थी। जबकि आंध्र प्रदेश की 47.4, अरुणाचल प्रदेश की 30.1 असम की 34.7 व बिहार की 26.9 प्रतिशत थी।
ऽ भारत में लेबर फोर्स दर 40 फीसदी औसतन थी, जबकि सीजी में 51.9 औसतन थी। इसी तरह देश में वर्कर पापुलेशन औसतन 38.2 फीसदी थी, जबकि सीजी में यह औसतन 46.6 रही।
आज तीन साल का समय भी नहीं बीता है लेकिन खेती की, किसान की, मजदूर की, महिलाओं की, नौजवानों की स्थिति में छत्तीसगढ़ में बड़ा फर्क आया है।
किसान कर्ज मुक्त हो गये है। 9000 करोड़ की कर्जमाफी कृषि ऋण माफी हमने की, जिसके लिये गंगाजल उठाया था।
फसलों की समर्थन मूल्य में खरीद से किसानों को लाभ मिल रहा है।
भाजपा की रमन सिंह सरकार में 15 साल तक धान की सिर्फ 50 लाख टन औसत खरीद की गयी।
आज कांग्रेस सरकार में 90 लाख टन धान से अधिक की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जा रही है।
समर्थन मूल्य पर खरीद के साथ-साथ राजीव गांधी किसान न्याय योजना का लाभ प्रदेश के 18.38 लाख किसानों 22 लाख 5628 करोड़ दिये गये। 2020-21 में 22 लाख किसानों को 5595 करोड़ जिसकी पहली किस्त 21 मई 2021 को किसानों के खातों में अंतरित दी जा चुकी है। दूसरी किस्त 20 अगस्त को किसानों को दी जायेगी।
गोधन न्याय योजना 2रू. किलो में गोबर खरीदकर गोठान समितियों द्वारा वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट
9950 गोठान स्वीकृत,
5590 गोठान निर्मित
अभी तक 96 करोड़ की राशि वितरित
1,68,531 लाभार्थी को मिला लाभ।
अब खेतिहर मजदूरों को भी न्याय योजना का लाभ मिलेगा।
बिजली बिल हाफ योजना से 27 महिनें में 40 लाख उपभोक्ताओं (39.63) को 1822 करोड़ रू. की राहत पहुंचाई गयी।
5.85 लाख किसानों को 5 हार्स पावर पंपों के लिये मुक्त बिजली दी गयी।
गरीबी रेखा के नीचे निवास करने वाले 18 लाख परिवारों को 30 यूनिट बिजली प्रतिमाह निःशुल्क में दी गयी।
