गहलोत को सीएम पद से हटाने से कम पर तैयार नहीं सचिन पायलट, कहा – अब आर या पार की लड़ाई
गहलोत को सीएम पद से हटाने से कम पर तैयार नहीं सचिन पायलट, कहा – अब आर या पार की लड़ाई
सचिन पायलट के करीबी सूत्र ने बताया कि उनके (BJP) में जाने की बात अफवाह है और अब ‘आर या पार’ की लड़ाई है. सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सीएम पद से हटाने से कम पर तैयार नहीं हैं.
राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर संकट गहरा गया है. उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने खुलकर बगावत कर दी है. सचिन पायलट ने कहा कि अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में है. इसके साथ-साथ पायलट ने यह भी कहा कि उनके पास 30 विधायकों का समर्थन है. उधर, सचिन पायलट के करीबी सूत्र ने बताया कि उनके (BJP) में जाने की बात अफवाह है और अब ‘आर या पार’ की लड़ाई है. सचिन पायलट मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सीएम पद से हटाने से कम पर तैयार नहीं हैं.
पायलट के करीबी सूत्र ने बताया कि ‘पंजाब, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष को ही मुख्यमंत्री बनाया गया और जब मेरी बारी आई तो राजस्थान में अपवाद हो गया. मुझसे कहा गया कि 2019 के लोकसभा चुनाव तक इंतजार कीजिए. इस बीच इनलोगों ने न तो कुर्सी छोड़ी और न ही हमें परेशान करना.
सचिन पायलट का मानना है कि 2018 में राजस्थान में कांग्रेस की जीत के बाद अशोक गहलोत का डिप्टी बनना उनकी मेहनत का प्रतिफल नहीं है.
राजस्थान के सियासी उठापटक के बीच आखिर क्यों सचिन पायलट से नहीं मिला गांधी परिवार?
आज से 9 दिन पहले जब उन्होंने आखिरी बार गांधी परिवार के करीबी से मुलाकात की थी तब अपनी बात रखी थी.
कांग्रेस पार्टी से खुलेआम बगावत करने वाले सचिन पायलट को अभी तक गांधी परिवार से मिलने का समय तक नहीं मिला है. पायलट ने 30 विधायकों के समर्थन का दावा किया था, जो कि राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार गिराने के लिए पर्याप्त थी. 42 साल के राजस्थान के डिप्टी सीएम अपने समर्थक विधायकों के साथ कल से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं. आज से नौ दिन पहले जब उन्होंने आखिरी बार गांधी परिवार के करीबी से मुलाकात की थी तब अपनी बात रखी थी. सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि किसी भी बैठक से पहले, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे और सांसद राहुल गांधी ने बातचीत का आधार तय किया. सूत्रों का कहना है कि गांधी परिवार के भरोसेमंद व्यक्ति के माध्यम से अपनी स्थिति बताई, लेकिन इस बार, सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री पद के लिए कुछ भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया है. ऐसा बताया जा रहा है कि कांग्रेस आलाकमान ने सचिन पायलट के अपने भरोसेमंद व्यक्ति के माध्यम से यह बता दिया था कि वह एक समय जरूर मुख्यमंत्री बनेंगे लेकिन उसमें अभी समय लगेगा अभी वह युवा हैं, उन्हें इंतजार करना चाहिए. आखिरकार वह राज्य के डिप्टी सीएम हैं, राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और पांच मंत्रालयों के इंचार्ज भी हैं.
पायलट ने कहा कि तीस विधायकों का समर्थन उनके पास है. उधर, सूत्रों ने बताया कि सचिन पायलट सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर सकते हैं।
इससे पहले सचिन पायलट ने कहा कि वह कांग्रेस विधायक दल की बैठक में भी शामिल नहीं होंगे. सोमवार को ये बैठक जयपुर में बुलाई गई है. इससे पहले आज रात 9 बजे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपना शक्ति प्रदर्शन करते हुए अपने घर पर कांग्रेसी विधायकों की बैठक बुलाई थी. इस बीच कांग्रेस आलाकमान ने अपने तीन नेताओं अजय माकन, रणदीप सिंह सुरजेवाला और अविनाश पांडे को भी जयपुर भेज दिया है.
अशोक गहलोत ने रविवार को ही कांग्रेस विधायकों की बैठक बुलाई, क्योंकि उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की नाराज़गी की ख़बरों के बाद उनकी सरकार को लेकर सवाल उठने लगे थे. इस बीच जयपुर में अशोक गहलोत के निवास पर कांग्रेस विधायकों की बैठक में सचिन पायलट समर्थक वो तीन विधायक भी शामिल हुए थे जो दिल्ली में पायलट के साथ मौजूद थे. इन विधायकों का कहना है कि वो कांग्रेस में ही रहेंगे और गहलोत सरकार बनी रहेगी.
बता दें कि सचिन पायलट तब से नाराज़ हैं जब से उन्हें पुलिस की एसओजी यानी स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप का समन मिला है. समन में पायलट को पूछताछ के लिए बुलाया गया है. एसओजी गहलोत सरकार को अस्थिर करने की साज़िश की जांच कर रही है. हालांकि इस मामले में गहलोत से भी पूछताछ होनी है लेकिन जानकार इसे सिर्फ़ दिखावे की पूछताछ बता रहे हैं. सचिन समर्थकों का कहना है कि किसी प्रदेश अध्यक्ष को पूछताछ का ऐसा नोटिस पहली बार थमाया गया है.बीजेपी ने अपना गुणा-भाग कर लिया है. 200 सदस्यीय राजस्थान विधानसभा में बीजेपी के 76 विधायक हैं और सरकार बनाने के लिए पार्टी को कम से कम 25 और विधायकों के समर्थन की आवश्यकता होगी
भाजपा ने राजस्थान के एक अनुभवी सांसद, भूपेंद्र यादव को घटनाक्रम की बारीकी से जांच करने का काम दिया है. मार्च में भाजपा के मध्य प्रदेश के मुख्य वास्तुकार ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने पूर्व सहयोगी सचिन पायलट के साथ संपर्क बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.इससे पहले रविवार को ज्योतिरादित्य ने सचिन पायलट पर ट्वीट किया, “यह देखकर दुख हो रहा है कि मेरे पूर्व सहयोगी सचिन पायलट को भी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा दरकिनार करके सताया जा रहा है. यह दर्शाता है कि कांग्रेस में प्रतिभा और क्षमता बहुत कम है.”
राज्य के राजनीतिक हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार सुबह साढ़े 10 बजे पार्टी विधायक दल की बैठक बुलाई है, जिसमें डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने शामिल होने से इनकार कर दिया है. दिल्ली में डेरा डाले सचिन पायलट ने यह भी दावा किया कि उन्हें 30 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है और गहलोत सरकार अल्पमत में है।
